भारतीय काव्यशास्त्र में "रस" को आत्मा कहा गया है। ये नौ रस जीवन और कला की संपूर्ण भावनाएँ हैं।
प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण का रस है। इसमें रति और माधुर्य की भावना व्यक्त होती है।
उदाहरण: राधा-कृष्ण का प्रेम इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
यह आनंद और हँसी की भावना से भरपूर होता है।
उदाहरण: विदूषक के संवाद या हास्य कविताएँ।
यह दुख, दया और संवेदना की भावना उत्पन्न करता है।
उदाहरण: सीता का वनवास, यशोदा का वियोग।
क्रोध और प्रतिशोध की भावना व्यक्त करता है।
उदाहरण: शिव का तांडव, दुर्गा का युद्ध।
इस रस में साहस, पराक्रम और उत्साह की भावना होती है।
उदाहरण: राम का रावण वध या अर्जुन का पराक्रम।
भय, आतंक और डर की भावना जगाता है।
उदाहरण: महिषासुर मर्दिनी या युद्ध के दृश्य।
यह घृणा और वितृष्णा की भावना प्रकट करता है।
उदाहरण: मृत्यु, कूड़ा या अत्याचार के दृश्य।
आश्चर्य और विस्मय की भावना को प्रकट करता है।
उदाहरण: हनुमान का लंका जलाना, विश्व की सुंदरता।
यह वैराग्य और आत्मिक शांति की भावना उत्पन्न करता है।
उदाहरण: बुद्ध का ध्यान, तपस्वियों का जीवन।
प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण का रस है। इसमें रति और माधुर्य की भावना व्यक्त होती है।
यह आनंद और हँसी की भावना से भरपूर होता है।
उदा: विदूषक के संवाद...
यह दुख, दया और संवेदना की भावना उत्पन्न करता है।
उदा: सीता का वनवास,...
क्रोध और प्रतिशोध की भावना व्यक्त करता है।
उदा: शिव का तांडव,...
इस रस में साहस, पराक्रम और उत्साह की भावना होती है।
उदा: राम का रावण...
भय, आतंक और डर की भावना जगाता है।
उदा: महिषासुर मर्दिनी या...
यह घृणा और वितृष्णा की भावना प्रकट करता है।
उदा: मृत्यु, कूड़ा या...
आश्चर्य और विस्मय की भावना को प्रकट करता है।
उदा: हनुमान का लंका...
यह वैराग्य और आत्मिक शांति की भावना उत्पन्न करता है।
उदा: बुद्ध का ध्यान,...