मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मोसों कहत, तू कहाँ गयो?
काहे नाइन आँसू ढरकायो?
— 🖋 सूरदास
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हमारी विरासत
मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मोसों कहत, तू कहाँ गयो?
काहे नाइन आँसू ढरकायो?
रहिमन धागा प्रेम का,
मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े,
जुड़े गाँठ पड़ जाय॥
बुरा जो देखन मैं चला,
बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना,
मुझसे बुरा न कोय।
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