मेरे दोस्त
ज़िन्दगी के सिलेबस में
हाड़ मांस से बनी
एक किताब तो
सभी को पढ़नी ही होती है।
बस फ़र्क केवल इतना होता है कि
जो हाड़ मांस से बनी किताब होती है
उसमें पन्नों की जगह पर
“स्वार्थ” रखा होता है,
और जैसे जैसे आप उस किताब के
पन्ने पलटते जाते है
आपको ज़िन्दगी के
कई फ़लसफ़े और
तजुर्बे मिलने लगते है।
जानते हो
ऐसी किताब की
पहचान क्या होती है?
ऐसी किताब की पहचान होती है
एक भोला सा
मासूमियत से लबरेज़
मन को आकर्षित करने वाला
उसका कवर…

पंकज कसरादे