हमारे पैसे उन शराबों में गए
जिनसे नशा नहीं हुआ
मैं जब तुम्हारे शहर में आया
बारिश का मौसम जा चुका था

मेरी जेब से पैसे तब चुराए गए
जब मैं तुम्हारे लिये
तोहफा ख़रीदने जा रहा था
मेरे अहबाब दुनिया से जल्द विदा हो गए
और दुश्मनों ने दुश्मनी न निभा के
मुझे निराश किया

मेरे देश का राजा अहंकारी
और प्रजा दृष्टिहीन थी
मेरी प्रेमिकाएँ मुझसे
शेर सुनाने की ज़िद करती थीं
और शेर समझ न आने पर
नाराज़ रहती थीं

मैं अच्छा सोचने ,लिखने और
पढ़ने वाला बेरोज़गार था
बदक़िस्मती के यूँ तो और भी उदाहरण है
पर बात बस इतनी ही है कि
मैं ख़राब किस्मत लिए हुए
एक अच्छा आदमी था..

आशु मिश्रा