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II अपनी भाषा , अपना मंच II

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kahani

सबक

यह शहर के बाहरी इलाके में बसी कॉलोनी का चाल था। तीन तरफ से एक के बाद एक बने बारह कमरे आगे की तरफ दीवार से लगे लोहे के दरवाजे से घिरे थे। बीच के बड़े से आँगन जैसी जगह… Continue Reading →

इंटरव्यू

आज उसकी जिंदगी का सबसे खास पल था।अपने सपने को वो पाने जा रही थी।हमेशा की तरह शांत और गंभीर रहने वाली कुहू आज नर्वस भी थी। जैसे ही पता चला कि उसका नम्बर सेकंड शिफ्ट में है, उसने थोड़ी… Continue Reading →

चिर-इंतज़ार

प्रतिदिन सुबह आर ब्लॉक के निकट देवी-मंदिर में पूजा करने जाते हुए मैं उस वृद्धा को मंदिर के बाजू के मकान के गेट पर बैठे देखा करती थी। सुबह-सवेरे वो तैयार होकर बैठी दिखती थी जैसे उसे किसी के आने… Continue Reading →

सीवर का ढ़क्कन

आज तीसरे दिन कर्फ्यू में चार घंटे की छूट दी गई थी—– हम लोग हालात नियंत्रण के लिए गश्ती पर निकले हुए थे— रास्ते में आम जनता से अधिक रैपिड एक्शन फोर्स के जवान नज़र आ रहे थे। सड़कों के किनारे लगे… Continue Reading →

लाजो

मेरा नाम तो है लाजवंती लेकिन गांव के लोग मुझे लाजो कह के बुलाते हैं। हमारे गांव से सिर्फ दस किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान की सरहद है। बचपन में ही बाप का साया सर से उठ गया था तब… Continue Reading →

एक मुस्कान

ये हवा ये गुलाबी मौसम सब बेमानी है तेरी एक मुस्कान से ये सुर्ख गुलाब ये तंज़ फ़िज़ा सब बेमानी है तेरी एक मुस्कान से खता हो जो बात झूठ कहूँ सिरफिरा हूँ अब तलक बेमान नही ना करूँ तेरे… Continue Reading →

कालाघर

एक ऐसी जगह जहां काला रंग श्रेष्ठता का प्रतीक है,जहां काले रंग की महिलाओं के लिए पुरूष तरसते है। जहां मुझ अभागे को इसीलिए संगनी नहीं मिली क्योंकि इनके पैमाने पर मेरे बदन का रंग गेरुआ है, दूसरी नजर में… Continue Reading →

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