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II अपनी भाषा , अपना मंच II

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तेरी आंखें

पर्वत, सहरा, कश्ती, दरिया तेरी आंखें हैं, दीपक-जुगनू-चांद-सितारे तेरी आंखें हैं। एक समन्दर लहराता सा मेरी पलकों में, और उसी का दूर किनारा तेरी आंखें हैं। जो जज़्बात उठा करते हैं दिल के पानी में, सच कहना क्या उनका चश्मा… Continue Reading →

अहसास

तुम इतनी सहज नहीं जितने कि पापा जितना कि मेरा दोस्त तुमसे बात करने से पहले सोचना पड़ता है उतना जितना कि घर जाने से पहले उतना जितना कि किताब पढ़ते वक्त पर तुम ढल जाती हो हर उस लड़की… Continue Reading →

कवि हूँ मैं

कुछ ख़्वाब ऐसे भी रहे जिन्हें ना पलकें मिली ना आंसुओ का साथ मिला जिन्हें ना रात की नींद नसीब हुई ना भोर की हक़ीक़त का साथ मिला मेरा ऐसे ख्वाबों से ही नाता है जब जब आँखों में ख़्वाब… Continue Reading →

होली

अरे वो भौजी कहाँ नुकाएल बाड़ु…. अरे तनी बहरियो निकलऽ …इ देख के आइल बा…तहर भैया । अरे ना ना हम ना निकलब रउरा सबे हमे रंग लगावे आइल बानी … अरे नाही हो निकल के देखऽ त सही… ना… Continue Reading →

बूढ़ी मां

जायदाद बंट गई… मां का घर बंट गया.. बेटे मॉडर्न थे.. मां का दुख न बांट सके.. सन्नाटा छा गया बंटवारे के किस्से में… जब मां ने पूछा ? मैं आई हूं किसके हिस्से में…?? -चंद्रप्रकाश गुर्जर

जादूगरनी

वो लड़की जादूगरनी थी। सचमुच की जादूगरनी। जब उस से प्रेम हुआ था तब मैंने कहा था “तुम्हारी आँखों में जादू है। एक तिलिस्म है जो मुझे मोम बना देता है” । मेरे इतने कहने पर वो खिलखिला कर हंसती… Continue Reading →

तुम आयी

तुम आयी जीवन दोपहरी को जैसे मधु-निशा मिल गयी मानचित्र पर नज़र गढाये ध्रुवतारे से आस लगाये टूटा हुआ कुतुबनुमा भी कैसे कोई राह दिखाये सागर के प्रश्नों से लड़ते उस क्रिस्टोफर कोलम्बस को जैसे उत्तर दिशा मिल गयी तुम… Continue Reading →

रिश्ते

रिश्ते बहुत मायने रखते हैं जिन्दगी में, समर्पण चाहिए इन्हें निभाने के लिए, ये भावनाओं से जिन्दा रहते हैं, ये प्यार से जिन्दा रहते हैं, ये सच से जिन्दा रहते हैं, माँ, बहन, पिता, भाई, मित्र, प्रेमी, सबके किरदार हैं… Continue Reading →

मैं वतन के लिए जीता हूँ

चाहे जितनी मुश्किलों का सामना करना पड़े, सबको हराकर जीत कायम करता हूँ, शांति, सौहार्द का हर एक पल गढ़ता हूँ, अपने वतन के प्रेम में हर क्षण जीता-मरता हूँ मैं वतन के लिए जीता हूँ. हर कोई चाहे छोड़… Continue Reading →

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